कम्प्युटर वायरस (विषाणु)
कम्प्युटर की कार्यप्रणाली पुरी तरह से कम्प्युटर प्रोग्राम पर निर्भर होता है, तरह-तरह के कार्य करने के लिए विशेष प्रोग्राम प्रयोग में लाये जाते हैं| विज्ञान के अविष्कार मानव सभ्यता के लिए वरदान होने के साथ ही साथ कभी-कभी अभिशाप भी बन जाते है, जहाँ एक तरफ़ परमाणु शक्ति का उपयोग उर्जा श्रोत के लिए वरदान बना हुआ है, दूसरी तरफ़ परमाणु बम के रूप में विनाषक अभिशाप भी साबित हुआ है| किसी भी ज्ञान-विज्ञान का वरदान या अभिषाप होना इस पर निर्भर करता है की उसका उपयोग मानव जाती के उत्थान में हो रहा है या उसका पतन करने के लिए| ठीक उसी तरह कम्प्युटर में प्राण-प्रतिष्ठा करने वाला प्रोग्राम यदि किसी दुर्भावना से ग्रसित होकर लिखे गए हैं तो वे हमें लाभ देने के बजाय हमें भारी हानि पहुँचा सकते हैं|
"कम्यूटर वायरस एक ऐसा प्रोग्राम है जो किसी दुर्भावना से ग्रसित हो कर बनाये जाते हैं, जिसका उद्देश्य कम्प्युटर एवं उसमें स्थित महत्वपूर्ण जानकारी को क्षति पहुंचाना होता है|" कम्प्युटर वायरस में ख़ुद की पुनरावृत्ति करने की अनोखी क्षमता होती है, ये कम्प्युटर के हर संचालन स्थान पर अपनी प्रतिलिपि छोड़ उन्हें भी संक्रमित कर देते है, यदि किसी वायरस संक्रमित कम्यूटर में फ्लॉपी डिस्क या पेन ड्राइव जोड़ते हैं तो कम्प्युटर वायरस उनपर अपनी प्रतिलिपि बना कर उन्हें भी संक्रमित कर देता है| फिर जब भी ये संक्रमित फ्लॉपी या पेन ड्राइव जिस भी कम्प्युटर से जोड़े जाते हैं वह भी संक्रमित हो जाता है| इसके अलावा आज इन्टरनेट और ई-मेल के चलन से वायरस का प्रसार तुंरत एवं तीव्र गति से हो रहा है| कम्प्युटर वायरस कम्प्युटर संजाल (Computer Network) की सहायता से उस संजाल से जुड़े सभी कम्प्युटर में आसानी से फैल जाते है| वायरस की यही कार्य-प्रणाली है, इसी प्रकार वायरस अपना प्रसार करते रहते है और देखते ही देखते विश्व भर के कम्प्युटर को संक्रमित कर उन्हें नुकसान पहुंचाते रहते हैं|
कम्प्युटर वायरस कार्य-पद्धति एवं नुकसान पहुँचाने के आधार पर कई तरह के होते हैं इनमें मुख्य हैं -
ट्रॉजन अश्व (Trojan Horse): ये एक वैध्य से लगने वाले कम्प्युटर प्रोग्राम के साथ जुड़े हुए रहते है, आमतौर पर ये इन्टरनेट पर मुफ्त में मिलने वाले प्रोग्राम के जरिये फैलते हैं| ये जिस कम्प्युटर पर स्थिति रहते है उसकी पुरी जानकारी गुप्त रूप से चुरा कर जिसने इन्हें गुप्त रूप से स्थापित किया है उसे भेज देते हैं| ट्रॉजन अश्व विभिन्न प्रकार के मुफ्त में मिलने वाले उपयोगी प्रोग्राम, खेल के प्रोग्राम, किसी अश्लील विश्वजाल के जरिये, किसी प्रचलित प्रोग्राम के नकली प्रतिलिपि के रूप में प्रसारित किए जाते है|
मैलवेयर (Malware): मैलवेयर Malicious Software का संक्षित रूप है| ये कम्पूटर के प्रोग्राम एवं सामग्री को गुप्त रूप से दूषित कर उन्हें क्षति पहुंचाते है| ये इन्टरनेट एवं ई-मेल के द्वारा कम्प्युटर में प्रवेश कर उसे दूषित कर देते हैं|
ऐडवेयर (Adware): ऐडवेयर ADvertisement Software का संक्षिप्त रूप है| ये संक्रमित कम्प्युटर पर किसी उत्पाद विशेष के विज्ञापन को दिखाने के लिए उपयोय में लाये जाते हैं|
स्पायवेयर (Spyware): स्पायवेयर कम्प्युटर के महत्वपूर्ण जानकारी, उपयोगकर्ता के द्वारा इन्टरनेट पर किए कार्य एवं उपयोगकर्ता की रूचि, उपयोगकर्ता के व्यक्तिगत जानकारी को गुप्त रूप से चुराकर स्पायवेयर स्थापित्य करनेवाले व्यक्ति अथवा संस्था को भेज दिया जाता है, जिसका उपयोग वे अपने अनुरूप करते हैं|
कीलागर (Keylogger): कीलागर संक्रमित कम्प्युटर पर किए गए हर कीस्ट्रोक की जानकारी अर्थात कुंजीपटल द्वारा लिखी गयी हर एक जानकारी इकठ्ठा कर जिसने कीलागर स्थापित किया है उसे भेज देता है| इससे उपयोगकर्ता की महत्त्वपूर्ण जानकारी जैसे पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर ईत्यादी ग़लत व्यक्ति या संस्था के हाथ लगने का खतरा बना रहता है|
कम्प्युटर वायरस कार्य-पद्धति एवं नुकसान पहुँचाने के आधार पर कई तरह के होते हैं इनमें मुख्य हैं -
ट्रॉजन अश्व (Trojan Horse): ये एक वैध्य से लगने वाले कम्प्युटर प्रोग्राम के साथ जुड़े हुए रहते है, आमतौर पर ये इन्टरनेट पर मुफ्त में मिलने वाले प्रोग्राम के जरिये फैलते हैं| ये जिस कम्प्युटर पर स्थिति रहते है उसकी पुरी जानकारी गुप्त रूप से चुरा कर जिसने इन्हें गुप्त रूप से स्थापित किया है उसे भेज देते हैं| ट्रॉजन अश्व विभिन्न प्रकार के मुफ्त में मिलने वाले उपयोगी प्रोग्राम, खेल के प्रोग्राम, किसी अश्लील विश्वजाल के जरिये, किसी प्रचलित प्रोग्राम के नकली प्रतिलिपि के रूप में प्रसारित किए जाते है|
मैलवेयर (Malware): मैलवेयर Malicious Software का संक्षित रूप है| ये कम्पूटर के प्रोग्राम एवं सामग्री को गुप्त रूप से दूषित कर उन्हें क्षति पहुंचाते है| ये इन्टरनेट एवं ई-मेल के द्वारा कम्प्युटर में प्रवेश कर उसे दूषित कर देते हैं|
ऐडवेयर (Adware): ऐडवेयर ADvertisement Software का संक्षिप्त रूप है| ये संक्रमित कम्प्युटर पर किसी उत्पाद विशेष के विज्ञापन को दिखाने के लिए उपयोय में लाये जाते हैं|
स्पायवेयर (Spyware): स्पायवेयर कम्प्युटर के महत्वपूर्ण जानकारी, उपयोगकर्ता के द्वारा इन्टरनेट पर किए कार्य एवं उपयोगकर्ता की रूचि, उपयोगकर्ता के व्यक्तिगत जानकारी को गुप्त रूप से चुराकर स्पायवेयर स्थापित्य करनेवाले व्यक्ति अथवा संस्था को भेज दिया जाता है, जिसका उपयोग वे अपने अनुरूप करते हैं|
कीलागर (Keylogger): कीलागर संक्रमित कम्प्युटर पर किए गए हर कीस्ट्रोक की जानकारी अर्थात कुंजीपटल द्वारा लिखी गयी हर एक जानकारी इकठ्ठा कर जिसने कीलागर स्थापित किया है उसे भेज देता है| इससे उपयोगकर्ता की महत्त्वपूर्ण जानकारी जैसे पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर ईत्यादी ग़लत व्यक्ति या संस्था के हाथ लगने का खतरा बना रहता है|
वायरस का प्रसारक्रम
कम्प्युटर वायरस के उत्पत्ति एवं विकास में कम्प्युटर प्रगती के विकासक्रम का सीधा सम्बन्ध रहा है| शुरूआती दौर में वायरस प्रसार के माध्यम बेहद ही सिमित थे, जैसे आंकड़े अदन-प्रदान के लिए फ्लॉपी डिस्क ही हुआ करते थे| साथ ही साथ उन दिनों कम्प्युटर का प्रचलन भी बेहद कम था| कम्प्युटर का उपयोग कुछ बड़े संस्थाओं में ही हुआ करता था| उस दौर में प्रोग्रामिंग कोड लिखना और उसमें नए नए प्रयोग करना एक जूनून सा हुआ करता था| सन् १९७० के दौरान आर्पानेट (Arpanet) जो की आज के इन्टरनेट का जनक है चलन में था| सर्वप्रथम जानकारी के अनुसार "क्रीपर" नामक वायरस कम्प्युटर के मोडेम का उपयोग कर आर्पानेट के जरिये DEC PDP-१० नामक कम्प्युटर को संक्रमित करता था| यह बोंब थॉमस द्द्वारा प्रयोगात्मक उद्देश्य से लिखा गया वायरस कोड था जो अपनी पुनरावृत्ति स्वयं ही करने में सक्षम था| आर्पानेट के जरिये क्रीपर दूरस्थ कम्प्युटर पर स्थापित हो "मैं क्रीपर हूँ; अगर पकड़ सकते हो तो मुझे पकडो" ऐसा सन्देश प्रदर्शित करता था| क्रीपर को हटानें के लिए रीपर प्रोग्राम लिखा गया|
एक आम धारणा है कि एक प्रोग्राम जो "रोथर J (Rother J)"कहलाता था वह "इन दी वाइल्ड " प्रकट होने वाला पहला कंप्यूटर वायरस था —यह एक कंप्यूटर के बाहर या प्रयोगशाला में बनाया गया, लेकिन यह दावा ग़लत था. लेकिन यह घर में उपयोग में लाये जाने वाले कम्प्यूटरों को संक्रमित करने वाला पहला वायरस था. यह रिचर्ड स्क्रेंता (Richard Skrenta), के द्वारा १९८२ में लिखा गया, इस वायरस नें ख़ुद को (Apple DOS) 3.3 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ जोड़ लिया और फ्लॉपी डिस्क (floppy disk) के द्वारा फैला. मूलतः यह वायरस एक हाई स्कूल के छात्र के द्वारा निर्मित एक मजाक मात्र था और इसे एक खेल के रूप में फ्लॉपी डिस्क पर डाल दिया गया.इसके ५० वें उपयोग पर Elk Cloner नमक वायरस सक्रिय हो जाता, जो सक्रीय होने पर कंप्यूटर को संक्रमित कर स्क्रीन पर एक छोटी कविता को प्रर्दशित करता था " Elk Cloner:The program with a personality".
इन दी वाइल्ड पहला पीसी वायरस एक बूट क्षेत्र का वायरस था जो (c)ब्रेन ((c)Brain)[३] कहलाता था, इसे फारूक अल्वी ब्रदर्स (Farooq Alvi Brothers) के द्वारा १९८६ में बनाया गया, तथा लाहौर , पाकिस्तान के बाहर संचालित किया गया. इन्होने इस कथित वायरस को उनके द्वारा बनाये गए सोफ्टवेयर की प्रतियों कि चोरी रोकने के लिए बनाया. यद्यपि, विश्लेषकों ने दावा किया कि Ashar वायरस जो, ब्रेन की एक प्रजाति है, संभवतः वायरस के अन्दर कोड के आधार पर इसे पूर्व दिनांकित करता है.
इससे पहले की कंप्यूटर नेटवर्क व्यापक होते अधिकांश वायरस हटाये जाने योग्य माध्यम (removable media), विशेष रूप से फ्लॉपी डिस्क (floppy disk) पर फैल गए. शुरुआती दिनों में निजी कंप्यूटर (personal computer), के कई उपयोगकर्ताओं के बीच नियमित रूप से जानकारी और प्रोग्रामों का विनिमय फ्लोपियों के द्वारा होता था. कई वायरस इन डिस्कों पर उपस्थित संक्रमित प्रोग्रामों से फैले, जबकि कुछ ने अपने आप को डिस्क के बूट क्षेत्र (boot sector) में इंस्टाल कर लिया, इससे यह सुनिश्चित हो गया की जब उपयोगकर्ता कंप्यूटर को डिस्क से बूट करेगा तो यह अनजाने में ही चल जाएगा. उस समय के पी सी पहले फ्लोपी से बूट करने का प्रयास करते थे, यदि कोई फ्लोपी ड्राइव में रह गई है. जब तक फ्लोपी का उपयोग कम नहीं हो गया तब तक यह सर्वाधिक सफल संक्रमण रणनीति थी, in the wild बूट क्षेत्र के वायरसों को बनाना सबसे आसान था.
पारंपरिक कंप्यूटर वायरस १९८० के दशक में उभरे , ऐसा निजी कंप्यूटर का उपयोग बढ़ने के कारण हुआ और इसके परिणाम स्वरुप BBS (BBS) और मॉडेम (modem) का उपयोग, तथा सॉफ्टवेयर का आदान-प्रदान बढ़ गया.बुलेटिन बोर्ड (Bulletin board) सॉफ्टवेयर के आदान प्रदान ने प्रत्यक्ष रूप से ट्रोजन होर्स प्रोग्राम्स को फैलाया, और वायरस लोकप्रिय व्यावसायिक सॉफ्टवेयर को संक्रमित करने के लिए बनाये जाते थे. शेयरवेयर (Shareware) और बूटलेग (bootleg) BBS के वायरस के लिए आम वाहक (vectors) थे. होबिस्ट्स के "पाइरेट सीन" में जो खुदरा सॉफ्टवेयर (retail software), की अवैध प्रतियों का व्य[पार कर रहे थे, व्यापारी आधुनिक अनुप्रयोगों और खेलों को जल्दी प्राप्त करना चाहते थे क्योंकि ये आसानी से वायरसों का लक्ष्य बनाये जा सकते थे.
१९९० के दशक के मध्य के बाद से, मैक्रो वायरस (macro virus) आम हो गए .इनमें से अधिकांश वायरस माइक्रोसोफ्ट प्रोग्राम जैसे वर्ड (Word) औरएक्सेल (Excel) के लिए पटकथा भाषाओं में लिखे जाते हैं. ये वायरस दस्तावेज़ और स्प्रेडशीट को संक्रमित करते हुए माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में फ़ैल जाते हैं.चूंकि वर्ड और एक्सेल मैक OS (Mac OS) के लिए भी उपलब्ध थे, इसलिए इनमें से अधिकांश वायरस Macintosh कंप्यूटर (Macintosh computers) पर भी फ़ैल सकते थे.इनमें से अधिकांश वायरसों में संक्रमित ई मेल भेजने की क्षमता नहीं थी.जो वायरस ईमेल के माध्यम से फ़ैल सकते थे उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक (Microsoft Outlook) COM (COM) इंटरफेस का फायदा उठाया.
मैक्रो वायरस ने सॉफ्टवेयर का पता लगाने में अद्वितीय समस्या उत्पन्न कर दी.उदाहरण के लिए , माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के कुछ संस्करणों ने मेक्रोस को अतिरिक्त रिक्त लाइनॉन के साथ अनुलिपित होने की इजाजत दे दी. वायरस समान रूप से व्यवहार करता था लेकिन इसे एक नए वायरस के रूप में पहचानने की भूल की जा रही थी.एक अन्य उदाहरण में, यदि दो मेक्रो वायरस एक दस्तावेज को एक साथ संक्रमित करते हैं और इन दोनों का संयोजन अपने आप को अनुलिपित कर सकता है, तो यह इन दोनों से "अलग" रूप में प्रकट होता है और एक वायरस होता है जो अपने " अभिभावकों " से अलग होता है.
एक वायरस एक संक्रमित मशीन पर सभी सम्पर्कों को त्वरित संदेश (instant message) के रूप में एक वेब पता (web address) लिंक भेज सकता है. यदि प्राप्तकर्ता, यह सोचता है कि लिंक एक मित्र ( एक विश्वसनीय स्रोत )से है, वह वेब साईट पर लिंक का अनुसरण करता है, साईट पर उपस्थित वायरस इस नए कंप्यूटर को संक्रमित करने में समर्थ हो सकता है और अपना प्रसार करने लगता है.
वायरस परिवार की सबसे नई प्रजाति है क्रोस साईट पटकथा वायरस.यह वायरस अनुसंधान से उभरा और २००५ में इसका अकादमिक रूप से प्रदर्शन हुआ. यह वायरस क्रोस साईट पटकथा (cross-site scripting) का उपयोग करके प्रसारित होता है. २००५ के बाद से in the wild, क्रोस साईट पटकथा वायरसों के बहुत से उदहारण रहे हैं, सबसे उल्लेखनीय प्रभावित साईटें हैं माइस्पेस (MySpace) और याहू.
एक आम धारणा है कि एक प्रोग्राम जो "रोथर J (Rother J)"कहलाता था वह "इन दी वाइल्ड " प्रकट होने वाला पहला कंप्यूटर वायरस था —यह एक कंप्यूटर के बाहर या प्रयोगशाला में बनाया गया, लेकिन यह दावा ग़लत था. लेकिन यह घर में उपयोग में लाये जाने वाले कम्प्यूटरों को संक्रमित करने वाला पहला वायरस था. यह रिचर्ड स्क्रेंता (Richard Skrenta), के द्वारा १९८२ में लिखा गया, इस वायरस नें ख़ुद को (Apple DOS) 3.3 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ जोड़ लिया और फ्लॉपी डिस्क (floppy disk) के द्वारा फैला. मूलतः यह वायरस एक हाई स्कूल के छात्र के द्वारा निर्मित एक मजाक मात्र था और इसे एक खेल के रूप में फ्लॉपी डिस्क पर डाल दिया गया.इसके ५० वें उपयोग पर Elk Cloner नमक वायरस सक्रिय हो जाता, जो सक्रीय होने पर कंप्यूटर को संक्रमित कर स्क्रीन पर एक छोटी कविता को प्रर्दशित करता था " Elk Cloner:The program with a personality".
इन दी वाइल्ड पहला पीसी वायरस एक बूट क्षेत्र का वायरस था जो (c)ब्रेन ((c)Brain)[३] कहलाता था, इसे फारूक अल्वी ब्रदर्स (Farooq Alvi Brothers) के द्वारा १९८६ में बनाया गया, तथा लाहौर , पाकिस्तान के बाहर संचालित किया गया. इन्होने इस कथित वायरस को उनके द्वारा बनाये गए सोफ्टवेयर की प्रतियों कि चोरी रोकने के लिए बनाया. यद्यपि, विश्लेषकों ने दावा किया कि Ashar वायरस जो, ब्रेन की एक प्रजाति है, संभवतः वायरस के अन्दर कोड के आधार पर इसे पूर्व दिनांकित करता है.
इससे पहले की कंप्यूटर नेटवर्क व्यापक होते अधिकांश वायरस हटाये जाने योग्य माध्यम (removable media), विशेष रूप से फ्लॉपी डिस्क (floppy disk) पर फैल गए. शुरुआती दिनों में निजी कंप्यूटर (personal computer), के कई उपयोगकर्ताओं के बीच नियमित रूप से जानकारी और प्रोग्रामों का विनिमय फ्लोपियों के द्वारा होता था. कई वायरस इन डिस्कों पर उपस्थित संक्रमित प्रोग्रामों से फैले, जबकि कुछ ने अपने आप को डिस्क के बूट क्षेत्र (boot sector) में इंस्टाल कर लिया, इससे यह सुनिश्चित हो गया की जब उपयोगकर्ता कंप्यूटर को डिस्क से बूट करेगा तो यह अनजाने में ही चल जाएगा. उस समय के पी सी पहले फ्लोपी से बूट करने का प्रयास करते थे, यदि कोई फ्लोपी ड्राइव में रह गई है. जब तक फ्लोपी का उपयोग कम नहीं हो गया तब तक यह सर्वाधिक सफल संक्रमण रणनीति थी, in the wild बूट क्षेत्र के वायरसों को बनाना सबसे आसान था.
पारंपरिक कंप्यूटर वायरस १९८० के दशक में उभरे , ऐसा निजी कंप्यूटर का उपयोग बढ़ने के कारण हुआ और इसके परिणाम स्वरुप BBS (BBS) और मॉडेम (modem) का उपयोग, तथा सॉफ्टवेयर का आदान-प्रदान बढ़ गया.बुलेटिन बोर्ड (Bulletin board) सॉफ्टवेयर के आदान प्रदान ने प्रत्यक्ष रूप से ट्रोजन होर्स प्रोग्राम्स को फैलाया, और वायरस लोकप्रिय व्यावसायिक सॉफ्टवेयर को संक्रमित करने के लिए बनाये जाते थे. शेयरवेयर (Shareware) और बूटलेग (bootleg) BBS के वायरस के लिए आम वाहक (vectors) थे. होबिस्ट्स के "पाइरेट सीन" में जो खुदरा सॉफ्टवेयर (retail software), की अवैध प्रतियों का व्य[पार कर रहे थे, व्यापारी आधुनिक अनुप्रयोगों और खेलों को जल्दी प्राप्त करना चाहते थे क्योंकि ये आसानी से वायरसों का लक्ष्य बनाये जा सकते थे.
१९९० के दशक के मध्य के बाद से, मैक्रो वायरस (macro virus) आम हो गए .इनमें से अधिकांश वायरस माइक्रोसोफ्ट प्रोग्राम जैसे वर्ड (Word) औरएक्सेल (Excel) के लिए पटकथा भाषाओं में लिखे जाते हैं. ये वायरस दस्तावेज़ और स्प्रेडशीट को संक्रमित करते हुए माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में फ़ैल जाते हैं.चूंकि वर्ड और एक्सेल मैक OS (Mac OS) के लिए भी उपलब्ध थे, इसलिए इनमें से अधिकांश वायरस Macintosh कंप्यूटर (Macintosh computers) पर भी फ़ैल सकते थे.इनमें से अधिकांश वायरसों में संक्रमित ई मेल भेजने की क्षमता नहीं थी.जो वायरस ईमेल के माध्यम से फ़ैल सकते थे उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक (Microsoft Outlook) COM (COM) इंटरफेस का फायदा उठाया.
मैक्रो वायरस ने सॉफ्टवेयर का पता लगाने में अद्वितीय समस्या उत्पन्न कर दी.उदाहरण के लिए , माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के कुछ संस्करणों ने मेक्रोस को अतिरिक्त रिक्त लाइनॉन के साथ अनुलिपित होने की इजाजत दे दी. वायरस समान रूप से व्यवहार करता था लेकिन इसे एक नए वायरस के रूप में पहचानने की भूल की जा रही थी.एक अन्य उदाहरण में, यदि दो मेक्रो वायरस एक दस्तावेज को एक साथ संक्रमित करते हैं और इन दोनों का संयोजन अपने आप को अनुलिपित कर सकता है, तो यह इन दोनों से "अलग" रूप में प्रकट होता है और एक वायरस होता है जो अपने " अभिभावकों " से अलग होता है.
एक वायरस एक संक्रमित मशीन पर सभी सम्पर्कों को त्वरित संदेश (instant message) के रूप में एक वेब पता (web address) लिंक भेज सकता है. यदि प्राप्तकर्ता, यह सोचता है कि लिंक एक मित्र ( एक विश्वसनीय स्रोत )से है, वह वेब साईट पर लिंक का अनुसरण करता है, साईट पर उपस्थित वायरस इस नए कंप्यूटर को संक्रमित करने में समर्थ हो सकता है और अपना प्रसार करने लगता है.
वायरस परिवार की सबसे नई प्रजाति है क्रोस साईट पटकथा वायरस.यह वायरस अनुसंधान से उभरा और २००५ में इसका अकादमिक रूप से प्रदर्शन हुआ. यह वायरस क्रोस साईट पटकथा (cross-site scripting) का उपयोग करके प्रसारित होता है. २००५ के बाद से in the wild, क्रोस साईट पटकथा वायरसों के बहुत से उदहारण रहे हैं, सबसे उल्लेखनीय प्रभावित साईटें हैं माइस्पेस (MySpace) और याहू.
वायरस से सुरक्षा एवं रोकथाम
हम अपने घर एवं दफ्तर में चोरों से बचाव के लिए कई सावधानियां एवं रोकथाम करते है, सरहद पर सेना सदैव तैनात रहती है की कहीं कोई घुसपैठ न हो जाये| इसी तरह हम अपने कम्प्युटर एवं कम्प्युटर नेटवर्क (संजाल तंत्र) को वायरस के संक्रमण से बहुत हद तक सुरक्षित रख सकते हैं| जिस तरह कंप्यूटर वायरस के प्रोग्राम लिखे एवं फैलाए जाते है, उनके रोकथाम एवं बचाव के लिए कम्प्युटर एंटी-वायरस प्रोग्राम भी बनाये गए हैं जो की वायरस को हमारे कम्प्यूटर या कम्प्युटर नेटवर्क में प्रवेश करने से रोक देता है, तथा यदि कोई कम्प्युटर पहले से ही संक्रमित हुआ है तो वह उस संक्रमण को कम्प्युटर से निकल कम्प्युटर को सुरक्षित कर देता है|
अंग्रेजी में एक कहावत है न की "Prevention is better than Cure" अर्थात "दवा से परहेज भली!!!" अर्थात यदि हम थोडी सी सावधानी बरतें तो कम्प्युटर में वायरस के हमले को बहुत हद तक रोका जा सकता है|
कुछ ध्यान रखने योग्य बचाव इस प्रकार हैं -
१) अपने कम्प्युटर पर कोई भी सुरक्षित एंटी-वायरस प्रोग्राम तथा फायरवाल स्थापित्य कर लें, सुरक्षा लिहाज से ये बहुत ही जरूरी होते हैं| आप अवास्ट एंटीवायरस जो की घरेलु उपयोग के लिए मुफ्त में उपलब्ध है का इस्तेमाल कर सकते है|
२) समय-समय पर अपने एंटी-वायरस प्रोग्राम का अद्यतन (Antivirus Update) करते रहे जिससे की उसके पास नए से नए वायरस को निरस्त करने की जानकारी मौजूद रहे|
३) कभी भी अनजान व्यक्ति के ई-मेल बिना समझे जाने न खोलें, तथा ई-मेल में आये संलग्न सामग्री को बिना समझे-जाने डाउनलोड न करें|
४) कभी भी लुभावने ई-मेल न खोलें, इन ई-मेल में वायरस होने की संभावना अत्यधिक होती है|
५) हरसंभव वयस्क (अश्लील) सामग्री वाले संजाल पते पर न ही जाये, यहाँ वायरस होने की संभावना अत्यधिक होती है|
६) जब भी कोई 'निकाले जाने वाले उपकरण' जैसे फ्लॉपी डिस्क, USB डिस्क, CD\DVD डिस्क अपने कम्प्युटर से जोड़े सर्प्रथम उसे एंटी वायरस प्रोग्राम की सहायता से जांच लें की कहीं वह संक्रमित तो नहीं है|
७) इन्टरनेट से किसी भी प्रकार की सामग्री डाउनलोड करने से पहले उसकी विस्वशनीयता को अच्छी तरह समझें तभी डाउनलोड करें|
८) इन्टरनेट पर मुफ्त में मिलने वाले प्रोग्राम, सॉफ्टवेर, गेम्स, संगीत या अन्य कोई भी सामग्री बिना एंटी-वायरस प्रोग्राम से जांचे उपयोग में न लायें|
९) अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को भी समय समय पर सुरक्षा पैबंद (Security Patch) से अद्यतन (Update) करते रहे, जिससे कम्प्युटर आतंरिक रूप से भी सुरक्षित रहे| ऑपरेटिंग सिस्टम के सिक्यूरिटी पैच उनके वेबसाइट पर उपलब्ध रहते हैं|
अंग्रेजी में एक कहावत है न की "Prevention is better than Cure" अर्थात "दवा से परहेज भली!!!" अर्थात यदि हम थोडी सी सावधानी बरतें तो कम्प्युटर में वायरस के हमले को बहुत हद तक रोका जा सकता है|
कुछ ध्यान रखने योग्य बचाव इस प्रकार हैं -
१) अपने कम्प्युटर पर कोई भी सुरक्षित एंटी-वायरस प्रोग्राम तथा फायरवाल स्थापित्य कर लें, सुरक्षा लिहाज से ये बहुत ही जरूरी होते हैं| आप अवास्ट एंटीवायरस जो की घरेलु उपयोग के लिए मुफ्त में उपलब्ध है का इस्तेमाल कर सकते है|
२) समय-समय पर अपने एंटी-वायरस प्रोग्राम का अद्यतन (Antivirus Update) करते रहे जिससे की उसके पास नए से नए वायरस को निरस्त करने की जानकारी मौजूद रहे|
३) कभी भी अनजान व्यक्ति के ई-मेल बिना समझे जाने न खोलें, तथा ई-मेल में आये संलग्न सामग्री को बिना समझे-जाने डाउनलोड न करें|
४) कभी भी लुभावने ई-मेल न खोलें, इन ई-मेल में वायरस होने की संभावना अत्यधिक होती है|
५) हरसंभव वयस्क (अश्लील) सामग्री वाले संजाल पते पर न ही जाये, यहाँ वायरस होने की संभावना अत्यधिक होती है|
६) जब भी कोई 'निकाले जाने वाले उपकरण' जैसे फ्लॉपी डिस्क, USB डिस्क, CD\DVD डिस्क अपने कम्प्युटर से जोड़े सर्प्रथम उसे एंटी वायरस प्रोग्राम की सहायता से जांच लें की कहीं वह संक्रमित तो नहीं है|
७) इन्टरनेट से किसी भी प्रकार की सामग्री डाउनलोड करने से पहले उसकी विस्वशनीयता को अच्छी तरह समझें तभी डाउनलोड करें|
८) इन्टरनेट पर मुफ्त में मिलने वाले प्रोग्राम, सॉफ्टवेर, गेम्स, संगीत या अन्य कोई भी सामग्री बिना एंटी-वायरस प्रोग्राम से जांचे उपयोग में न लायें|
९) अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को भी समय समय पर सुरक्षा पैबंद (Security Patch) से अद्यतन (Update) करते रहे, जिससे कम्प्युटर आतंरिक रूप से भी सुरक्षित रहे| ऑपरेटिंग सिस्टम के सिक्यूरिटी पैच उनके वेबसाइट पर उपलब्ध रहते हैं|



